Kahana Chhati 2022: जन्म के बाद इस दिन मनाई जाएगी श्री कृष्ण की छठी 20 करोड़ एकादशी का फल

जन्माष्टमी का व्रत रखने से 20 करोड़ एकादशी का फल:

हिंदू पुराण में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के दिन रखे जाने वाले व्रत की अपार महिमा बताई गई है। ऐसी मान्यता है कि कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से 20 करोड़ एकादशी का फल मिलता है। जन्माष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु और पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है मोक्ष की प्राप्ति होती है।                

Kahana Ji
    

यूं मनाएं कृष्ण जी की छठी (Krishan Chhati) 

जन्माष्टमी पर कान्हा जी का जन्म होता है और छह दिन बाद कृष्ण जी की छठी की पूजा की जाती हैइस दिन सुबह स्नना के बाद बाल गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान करवाया जाता है. इसके बाद दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरें और बाल गोपाल का फिर से अभिषेक करेंशास्त्रों के अनुसार छठी वाले दिन नवजात को नए कपड़े पहनाए जाते हैं. उसका नाम करण किया जाता है. छठी के दिन कढ़ी चावल बनाने की परंपरा

Kahana Ji Chhati

हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के बाद छह दिन के बाद छठी मनाई जाती है. उसी प्रकार जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण के जन्म के छह दिन बाद छठी मनाई जाती है. इसे कृष्ण छठी के नाम से जाना जाता है. बता दें कि नवजात बच्चे की मंगल कामना के लिए छठी पूजन किया जाता है. इसी प्रकार हर साल की तरह इस साल भी 24 अगस्त 2022 को छठी मनाई जाएगीआइए जानते हैं छठी पूजान की विधि के बारे में.

जन्माष्टमी पर कान्हा जी का जन्म होता है और छह दिन बाद कृष्ण जी की छठी की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह स्नना के बाद बाल गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान करवाया जाता है. इसके बाद दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरें और बाल गोपाल का फिर से अभिषेक करें. कान्हा को उनके प्रिय रंग पीले रंग के वस्त्र पहनाएं और उनका ऋंगार करें. इस दौरान चंदन का टीका लगाएं, धप,दीप अर्पित करें.

इसके बाद कान्हा को उनका प्रिय भोग माखन मिश्री का भोग लगाएं. इसके बाद उनका कोई भी पंसदीदा नाम जैसे- लड्डू गोपाल, ठाकुर जी, कान्हा, माधव, आदि नाम रख सकते हैं. छठी के बाद उन्हें उसी नाम से बुलाएं. मान्यता है कि इस दिन घर में कढ़ी चावल बनाए जाते हैं.  


Nand Lal Kahanaiya

इसलिए मनाई जाती है कान्हा जी की छठी

छठी पर षष्ठी देवी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार षष्ठी देवी की कृपा से राजा प्रियव्रत का मृतपुत्र फिर से जीवित हो गया था. शास्त्रों में षष्ठी देवी को बच्चों की अधिष्ठात्री देवी कहा गया हैं. इसलिए नवजात की छठे दिन षष्ठी देवी की पूजा करने से  बच्चे को कुछ नहीं होता और बच्चा स्वस्थ रहता है

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FAQ: क्या आप कृष्ण के बारे में यह जानते हैं

Q. कृष्‍ण जन्‍म भूमि कहां हैं?
Ans. मथुरा


Q. . भगवान श्री कृष्ण किसके अवतार थे?
Ans. विष्णु

Q. श्री कृष्ण की कितनी पत्नियां थी
Ans. 16 हजार 108


Q. . श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान किसे सुनाया?

Ans. अर्जुन

Q.भगवान कृष्‍ण की प्रेमिका राधा रानी कहां की रहने वाली थीं?
Ans. बरसाना

Qलड्डू गोपाल की रोज पूजा कैसे की जाती है?

Ans.अगर अपने ने लड्डू गोपाल की सेवा के दौरान लड्डू गोपाल को रोजाना स्नान और चार समय भोग लगाना होता है। 

Q. कान्हा जी को भोग कैसे लगाते हैं?

Ans  भगवान कृष्ण को पंजीरी के साथ पंचामृत का भोग प्रिय है. बिना पंचामृत के श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी रह जाती है. इसलिए इन्हें पंचामृत का भोग जरूर लगाना चाहिए. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, चीनी से बनकर तैयार किया जाता है.


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