Ganesh Visarjan 2022: गणेश जी की प्रतिमा का क्यों किया जाता है विसर्जन Jane जाने पूरी जानकारी
Ganesh Visarjan 2022 यहां से शुरू हुई परंपरा
भारतीय इतिहास में इस परंपरा की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र से की थी. उन्होंने ये अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ एकजुट होने के लिए की थी. उन्हें ये बात अच्छे से पता थी कि भारतीय आस्था के नाम पर एकजुट हो सकते हैं. इसलिए उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश महोत्सव की शुरुआत की और वहां गणेश विसर्जन भी किया जाने लगा. गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन ही किया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन घर में गणेशजी को लाया जाता है और अनंत चतुर्दशी के दिन विदाई दी जाती है। इस दिन पर अमृत काल और रवि नामक योग का निर्माण हो रहा है। इन शुभ योग में गणेशजी की विदाई करने से सभी कष्ट व विघ्न दूर होते हैं।
गणेश विसर्जन (Ganpati Visarjan- 2022)
मान्यता है कि गणेशजी ने ही महाभारत ग्रंथ को लिखा था। महर्षि वेदव्यास ने गणेशजी को लगातार 10 दिन तक महाभारत की कथा सुनाई और गणेशजी ने 10 दिनों तक इस कथा को हूबहू लिखा। गणेश महोत्सव का आखिरी दिन गणेश विसर्जन की परंपरा है. 10 दिवसीय महोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के बाद होता है. परंपरा है कि विसर्जन के दिन गणेशजी को शीतल की मूर्ति का नदी, समुद्र या जल में विसर्जित करते हैं.
विसर्जन का नियम इसलिए है कि मनुष्य यह समझ ले कि संसार एक चक्र के रूप में चलता है भूमि पर जिसमें भी प्राण आया है वह प्राणी अपने स्थान को फिर लौटकर जाएगा और फिर समय आने पर पृथ्वी पर लौट आएगा।विसर्जन का अर्थ है मोह से मुक्ति, आपके अंदर जो मोह है आप बप्पा की मूर्ति को बहुत प्रेम से घर लाते हैं उनकी छवि से मोहित होते हैं लेकिन उन्हें जाना होता है प्रार्थना कीजिए कि बप्पा फिर लौटकर आएं, उनको विदा कर दे

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