बढ़ते स्क्रीन टाइम का बच्चों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है What effect does increasing screen time have on children's brains?


बढ़ते स्क्रीन टाइम का बच्चों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है
असल में मैं इस बात पर नज़र नहीं रख पा रही थी कि वह कितनी देर से इसका इस्तेमाल कर रहा है या वह क्या देख रहा है. फिर तो जैसे तूफ़ान आ गया. वह चिल्लाया, पैर चलाए, आईपैड को पकड़ कर बैठ गया और मुझे दूर धकेलने की कोशिश करने लगा, पूरे गुस्से में और पांच साल के छोटे बच्चे की पूरी ताक़त के साथ ईमानदारी से कहूं तो ये मेरे लिए बेहद परेशान करने वाला लम्हा था. मेरे बच्चे की तीखी प्रतिक्रिया मुझे परेशान कर गई.मेरे बड़े बच्चे सोशल मीडिया, वर्चुअल रिएलिटी और ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में क़दम रख चुके हैं और कई बार वह भी चिंता का कारण बनता है.स्क्रीन टाइम अब बुरी ख़बर का पर्याय बन चुका है. इसे युवाओं में डिप्रेशन, व्यवहार संबंधी समस्याएं और नींद की कमी जैसी समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. मशहूर न्यूरोसाइंटिस्ट बैरोनेस सुसान ग्रीनफ़ील्ड ने तो यहां तक कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल और कंप्यूटर गेम्स किशोर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं. 2013 में उन्होंने लंबे स्क्रीन टाइम के नकारात्मक प्रभावों की तुलना जलवायु परिवर्तन के शुरुआती दौर से की थी, यानी एक ऐसा बड़ा बदलाव जिसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे थे. स्क्रीन टाइम अब बुरी ख़बर का पर्याय बन चुका है. इसे युवाओं में डिप्रेशन, व्यवहार संबंधी समस्याएं और नींद की कमी जैसी समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. मशहूर न्यूरोसाइंटिस्ट बैरोनेस सुसान ग्रीनफ़ील्ड ने तो यहां तक कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल और कंप्यूटर गेम्स किशोर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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आज बहुत से लोग इस मुद्दे को पहले से ज़्यादा गंभीरता से ले रहे हैं. लेकिन स्क्रीन के नकारात्मक पक्ष को लेकर दी ने वाली चेतावनियां शायद पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं.


ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे एक संपादकीय में कहा गया कि बैरोनेस ग्रीनफ़ील्ड के मस्तिष्क संबंधी दावे "वैज्ञानिक तथ्यों के निष्पक्ष विश्लेषण पर आधारित नहीं हैं… और वे अभिभावकों व आम लोगों को ग़लत दिशा में ले जाते हैं."

ब्रिटेन के कुछ अन्य वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों को लेकर पुख़्ता वैज्ञानिक सबूतों की कमी है. तो क्या हम अपने बच्चों की स्क्रीन एक्सेस को लेकर जो चिंता कर रहे हैं वह सही दिशा में है या नहीं?

आज बहुत से लोग इस मुद्दे को पहले से ज़्यादा गंभीरता से ले रहे हैं. लेकिन स्क्रीन के नकारात्मक पक्ष को लेकर दी जाने वाली चेतावनियां शायद पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं.

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे एक संपादकीय में कहा गया कि बैरोनेस ग्रीनफ़ील्ड के मस्तिष्क संबंधी दावे "वैज्ञानिक तथ्यों के निष्पक्ष विश्लेषण पर आधारित नहीं हैं… और वे अभिभावकों व आम लोगों को ग़लत दिशा में ले जाते हैं."

ब्रिटेन के कुछ अन्य वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों को लेकर पुख़्ता वैज्ञानिक सबूतों की कमी है. तो क्या हम अपने बच्चों की स्क्रीन एक्सेस को लेकर जो चिंता कर रहे हैं वह सही दिशा में है या नहीं?

बच्चे की आंखों को मोबाइल स्क्रीन से कैसे बचाएं:-
माता-पिता बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखने और गैजेट्स के नुकसान से बचाने के लिए नीचे बताये गए उपाय अपना सकते हैं।

स्क्रीन टाइम को सीमित करें - बच्चों का स्क्रीन टाइम प्रतिदिन 1-2 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए। छोटे बच्चों (2 साल से कम) को मोबाइल या टैबलेट से पूरी तरह दूर रखें। स्कूल के बाद पढ़ाई और खेल के लिए समय निर्धारित करें ताकि गैजेट्स का उपयोग कम हो।
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20-20-20 नियम अपनाएं - हर 20 मिनट में बच्चों को 20 सेकंड का ब्रेक लेने के लिए कहें जिसमें वे 20 मीटर दूर की किसी चीज को देखें। इससे आंखों को आराम मिलता है और थकान कम होती है।
सही दूरी और रोशनी का ध्यान रखें - मोबाइल और आंखों के बीच कम से कम 25-30 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। स्क्रीन की चमक को कम करें और अंधेरे में मोबाइल का उपयोग न करने दें। कमरे में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए ताकि आंखों पर जोर न पड़े।

ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग - मोबाइल में ब्लू लाइट फिल्टर सेटिंग्स चालू करें। अगर बच्चा ज्यादा देर स्क्रीन का उपयोग करता है तो ब्लू लाइट ब्लॉकिंग चश्मे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें - बच्चों को रोजाना कम से कम 1-2 घंटे बाहर खेलने या प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए प्रेरित करें। इससे उनकी आंखें स्वस्थ रहती हैं और मायोपिया का खतरा कम होता है।
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नियमित आंखों की जांच - हर 6-12 महीने में बच्चों की आंखों की जांच करवाएं खासकर अगर वे गैजेट्स का नियमित उपयोग करते हैं। शुरुआती जांच से समस्याओं को समय पर पकड़ा और ठीक किया जा सकता है।

गैजेट-मुक्त समय बनाएं - घर में कुछ घंटे ऐसे रखें जब कोई भी गैजेट का उपयोग न करे। खाने की मेज पर या सोने से पहले मोबाइल का उपयोग पूरी तरह बंद करें।

यह आर्टिकल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।

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